October 9, 2007...11:34 pm
भगत सिंह की जन्मशती पर खटकड़कला इंकलाब के नारो से गूंज उठा
शहीद भगत सिंह तुम्हारे काम अधूरे , हम सब मिलकर करेंगे पूरे। भगत सिंह के पुश्तैनी गांव खटकड़कला में ‘राजगुरु द्वार’ से होकर सुसज्जित मैदान में आने वाले हजार से अधिक महिलाओं, पुरुषों, युवाओं व छात्रों ने इस आवाह्न को अपनाया। गांव से जाने वाले मुख्य राजमार्ग पर स्थित भगत सिंह संग्रहालय के समीप इस मैदान में सी.पी.आई. (एम–एल)–न्यू डेमोक्रेसी की पंजाब राज्य कमेटी ने भगत सिंह की जन्मशती के अवसर पर 28 सितम्बर, 2007 को जनसभा का आयोजन किया। पंजाब के विभि जिलों से बड़ी संख्या में लोग टै्रक्टर–ट्रालियों, बसों व अन्य वाहनों से पार्टी के लाल झण्डे थामे जनसभा में पहुंचे।
जनसभा में भाग लेने वालों में किसानों और मजदूरों के अलावा वकील तथा अन्य बुद्धिजीवी थे। महिलाओं की संख्या एक तिहाई से अधिक थी और उनमें से अधिकांश अपने छोटे बच्चों के साथ सभा में भाग लेने पहुंची थीं। चार हजार छात्रों व युवाओं की रैली नौजवान भारत सभा तथा पंजाब स्टूडेन्ट्स यूनियन के झण्डे तले निकटवर्ती गांव से खटकरकलां तक सी.पी.आई. (एम–एल)–न्यू डेमोक्रेसी की सभा में भाग लेने पहुंची। नारे लगाते व बैनरों के साथ पी.एस.यू., एन.बी.एस. रैली जब पंडाल में पहुंची तब मैदान खचाखच भर गया, तो सभा में शामिल लोग सड़क पर भी बैठ गये। गगनभेदी साम्राज्यवाद–विरोधी नारों के साथ उस युवा रैली ने सभा में ऊर्जा का संचार कर दिया। इस रैली में लड़कियों की भागीदारी काफी अधिक थी।
बहुत–सी बच्चियों ने मंच के संचालनकर्ता से गीत गाने की इच्छा जाहिर की परन्तु केवल एक बच्ची, जो कैंसर की मरीज है, को अवसर दिया जा सका। उसने स्वरचित कविता कितना मजा आयेगा जब मैं नेता बन जाऊंगी गायी जिसमें शासक वर्गों के नेताओं के भ्रष्ट व जन–विरोधी आचरण पर व्यंग्य कसा गया। अनेक युवा साथियों ने गीत गाये तथा विक्टर राजू ने संतराम उदासी की कविता का मनमोहक गायन किया। विभि जिलों से गायक तथा कलाकार शामिल हुये जिनमें लोक संगीत मंडली, सहजली शामिल थे। मुख्तार सिंह जफर व गुरपिंदर सिंह ने भगत सिंह के जीवन–संघर्ष तथा शहादत को कविता के रूप में पेश किया।
दोपहर साढ़े बारह बजे पार्टी नेता का. एस.एस. महल, पंजाब राज्य कमेटी के सचिव का. दर्शन सिंह खटकर, का. अजमेर सिंह, का. गुरमीत सिंह; झारखण्ड से पार्टी नेता का. वी.के. पटोले, दिल्ली कमेटी की सचिव का. अपर्णा व अन्य साथी भगत सिंह संग्रहालय गये। संग्रहालय में, जहां तीन शहीदों का अस्थिकलश तथा अन्य सामान रखा है उन्होंने भगत सिंह की मूर्ति पर पुष्पार्पण किया तथा साम्राज्यवाद के खिलाफ नारे लगाये।
उसके बाद का. कुलविंदर ने जनसभा की कार्रवाई शुरू की तथा का. सुखराज सिंह चीमा से सभा की अयक्षता करने का अनुरोध किया। सभा के मंच पर पार्टी नेताओं के साथ शहीद भगत सिंह के भांजे प्रो. जगमोहन सिंह भी शामिल थे। अपने वक्तव्य में जगमोहन सिंह ने कहा कि मनमोहन सिंह के भारत में युवाओं को रोजगार नहीं है, मजदूरों की नौकरियों छिन रही हैं तथा किसानों की जमीन छिन रही है। साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष तेज करना जरूरी है और हम सभी को भगत सिंह बनना चाहिए व अपने–आपको साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए समर्पित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का इंकलाब जिंदाबाद का नारा समानता पर अधारित समाज के लिए था तथा अन्य असमानताओं के साथ लैंगिक असमानता के खात्मे के लिए था। उन्होंने कहा कि जनता की ताकत, एकता व संघर्ष साम्राज्यवादी लूट व दोहन को खत्म कर सकता है। प्रो. जगमोहन सिंह ने श्री अजीत राही द्वारा लिखे गये उपन्यास का विमोचन किया तथा लोक संगीत मंडली, सहजली द्वारा भगत सिंह पर बनाया गया कैसेट जारी किया।
का. अजमेर सिंह ने कहा कि पार्टी द्वारा की जा रही जनसभा तथा अन्य स्थानों पर हो रही सभायें दिखाती हैं कि लोग भगत सिंह को कितना प्यार करते हैं। उन्होंने कहा कि विभि पार्टियां अलग मकसद से कार्यक्रम कर रही हैं और हमारा उद्देश्य भगत सिंह के विचारों को आत्मसात करना होता है। प्रकाश सिंह बादल का कहना है कि कौमों के साझा नायक होते हैं परन्तु वह झूठ बोलता है। मनमोहन सिंह ने ओक्स्फ़ोर्द जाकर भारत पर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की प्रशंसा की जबकि भगत सिंह का मानना था कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने हिन्दुस्तान को खूब निचोड़ा है। आर.एस.एस. के सुदर्शन का कहना है कि भगत सिंह आर्यसमाजी थे, दूसरों का कहना है कि वे सिक्ख थे परन्तु, असल में वे यह सब न होकर नये समाज के लिए लड़ने वाले एक योद्धा थे।
का. वी.के. पटोले ने कहा कि हमें जानना चाहिए कि भगत सिंह किस तरह के समाज के लिए लड़ रहे थे। वे भारत में समाजवाद के निर्माण का सपना रखते थे जिसमें मजदूर और किसान आजाद हों। भारत की जनता के दोस्तों और दुश्मनों के बारे में उनकी समझ स्पष्ट थी। वे जनता के मुद्दों से जुड़े थे। 1947 ’ के पहले कांग्रेस जनता को गुमराह करती थी कि वह ब्रिटिश–विरोधी संघर्ष में गंभीरता से लगी है जबकि वह असल में ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के साथ सहयोग कर रही थी। आज शासक वर्गों की सभी पार्टियां यही तिकड़में अपनाती हैं। भाजपा व कांग्रेस तो नंगी हो गई हैं और शासक ‘वाम’ पार्टियां भी यही कर रही हैं। भगत सिंह ने चेतावनी दी थी कि साम्राज्यवाद के सहयोगी सत्ता में आयेंगे तथा संघर्ष को जारी रखना होगा। आज जनता के सभी हिस्सों पर हमला हो रहा है तथा इसके खिलाफ संघर्षों को तेज करना जरूरी है।
का. दर्शन सिंह खटकड़ ने कहा कि शासक वर्गों की बहुत–सी पार्टियां भगत सिंह की जन्मशती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। पर, हमें उनके विचारों को भगत सिंह के विचारों की कसौटी पर परखना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस ब्रिटिश के खिलाफ लड़ने के नाम पर असल में भारत के क्रान्तिकारियों के खिलाफ लड़ रही थी। में जो हुआ और उसके बाद से जो हो रहा है वह हम सबके सामने है। आज कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत एक बहुत ताकतवर देश बन गया है, परन्तु विश्व व्यापार संगठन के समझौते ने हमारे देश को साम्राज्यवादी ताकतों के शोषण का चारागाह बना दिया है; जनता के पास अधिकार नहीं है। किसान, मजदूर, दुकानदार व नौजवान आत्महत्यायें करने पर मजबूर हैं, छोटे व्यापारियों पर भी हमला हो रहा है। सी.पी.एम., सी.पी.आई. जैसी पार्टियां इन नीतियों के विरोा का दिखावा भर करती हैं जबकि शासक वर्गों की सभी पार्टियां देश के लूट व दोहन पर एकमत हैं।
का. एस.एस. महल ने कहा कि इस दिन बहुत से लोग पैदा हुए परन्तु हम भगत सिंह को याद करते हैं। वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया ताकि वह अपने दादा के साथ किये गये देश की आजादी के लिए समर्पण के वायदे को पूरा कर सकें। जब उनके पिता ने लाहौर अदालत के फैसले, जिसमें उनको मृत्युदण्ड दिया गया था, के खिलाफ अपील की तो उन्होंने उनकी आलोचना की। का. महल ने कहा कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष में दो तरह की ताकतें थीं एक गांधी, नेहरू और कांग्रेस के नेतृत्व में साम्राज्यवाद की सहयोगी ताकतें और दूसरे मजदूरों और किसानों की इंकलाबी लहर। गांधी व नेहरू शोषक वर्गों के नेता थे तथा गांधी को भले ही राष्ट्रपिता कहा जाये, लोग जानते हैं कि वास्तव में उन्होंने देश के साथ गद्दारी की। परन्तु, भगत सिंह की भूमिका से कोई इंकार नहीं करता तथा वे आम लोगों के चहेते नायक हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ब्रिटिश शासकों के इशारे पर बनायी गयी थी तथा जन्म से ही इसका चरित्रा समर्पणवादी था। शासक वर्गों की सभी पार्टियां आज यही कर रही हैं तथा साम्राज्यवाद के सेवक देश पर राज कर रहे हैं। मनमोहन सिंह को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्त के अनुसार वित्त मंत्री बनाया गया था। आज गांधी के तीन बंदर मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह अहलुवालिया तथा चिदम्बरम दिल्ली पर राज कर रहे हैं। ब्रिटिश शासकों ने लाखों भारतीयों को मारा तथा जेलों में सड़ाया, परन्तु मनमोहन सिंह ब्रिटिश शासन की तारीफ करते हैं। देश की जनता को समझना होगा कि साम्राज्यवाद–परस्त ताकतें भारत पर राज कर रही हैं तथा भगत सिंह से प्रेरणा लेने वालों को अपने कार्यों को निर्धारित करते समय इसको ध्यान में रखना होगा।
का. अपर्णा ने कहा कि नौजवान भारत सभा के कार्यक्रम में भगत सिंह व उनके साथियों ने स्पष्ट इंगित किया कि बीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासक भारत के पूंजीपतियों को रियायतें देकर अपने पक्ष में कर रहे हैं। गांधी द्वारा असहयोग आन्दोलन वापस लेने की पृष्ठभूमि में भगत सिंह ने गांधी व कांग्रेस के सहयोगवादी चरित्रा को बेनकाब किया। हिंसा के सवाल पर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी किस प्रकार भारतीय जनता के संघर्ष को कुंद करना चाहते हैं। उन्होंने युवाओं का विशेष आवाह्न करते हुए कहा कि मानव समाज का इतिहास युवाओं व युवतियों के बलिदानों का इतिहास है। भगत सिंह एक उदाहरण हैं जिन्होंने अपने उद्देश्यों के लिए काम करते हुए अपने को शिक्षित किया और अपनी समझ का विकास किया। अपने छोटे से जीवन में उन्होंने देश के अनेक हिस्सों में काम किया। भारत के लिए उनके कार्यक्रम में जमींदारी का खात्मा, किसान के कर्जे माफ करना तथा समाजवाद का निर्माण था; जो उन्होंने के अंत में जेल में लिखा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा था कि भारत असल में आजाद नहीं होगा बल्कि सत्ता काले अंग्रेजों के हाथ में आ जायेगी और ऐसा ही हुआ। भगत सिंह के सपनों के भारत के निर्माण का ठोस तरीका नक्सलवादियों द्वारा रेखांकित रास्ते के द्वारा ही संभव है। नक्सलवादी तथा सी.पी.आई. (एम–एल) ही भगत सिंह के असली वारिस हैं। हमें ऐसे भारत के निर्माण के लिए नवजनवादी क्रांति को तेज करना चाहिए।
का. गुरमीत सिंह ने कहा कि पिछली शताब्दी में भी भगत सिंह को महान व्यक्ति समझा जाता था और इस शताब्दी में भी। उनकी जन्मशती न केवल भारत में बल्कि पाकिस्तान में भी मनायी जा रही है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह कोई विशेष व्यक्ति नहीं थे। वे ऐसे युवा थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने–आपको समर्पित कर दिया और हम सब ऐसा कर सकते हैं। भगत सिंह के सपनों को पूरा करने के लिए हमें भारत के मजदूरों और किसानों को संगठित करना चाहिए जो शासकों की साम्राज्यवाद–परस्त नीतियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। कलिंगनगर, सिंगुर, नंदीग्राम इन संघर्षों के उदाहरण हैं तथा देश भर में जनता ठेका खेती और खुदरा व्यापार में बड़ी कम्पनियों के प्रवेश के खिलाफ संघर्षरत है।
का. प्रभुदयाल (श्रीगंगानगर, राजस्थान), नेपाल जनाधिकार सुरक्षा समिति के दान सिंह प्रजापते तथा एन.बी.एस. नेता का. रमेन्दर सिंह ने भी सभा को सम्बोधित किया। सभा में एक चारसूत्रिय प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें विशेष आर्थिक क्षेत्रा कानून की वापसी की मांग की गयी तथा खुदरा व्यापार में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व बड़ी कम्पनियों के प्रवेश का विरोा किया गया। लखनऊ में के हत्यारे अंग्रेजों का महिमागान करने आये ब्रिटिश नागरिकों की गिरतारी की मांग की गयी तथा जलियांवाला बाग के द्वार को बरकरार रखने की मांग की गयी। सरकार जलियांवाला बाग के द्वारा को चौड़ा कर कारों के आवागमन का रास्ता बनाना चाहती है।
इंकलाब जिंदाबाद तथा साम्राज्यवाद– विरोधी नारों के बीच सभा का समापन हुआ।
इलाहाबाद : भाकपा (माले)–न्यू डेमोक्रेसी की इलाहाबाद कमेटी के नेतृत्व में सितम्बर को शहीद–ए–आजम भगत सिंह की वीं जयंती के अवसर पर घूरपुर सब्जी मण्डी से एक जुलूस निकला जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। रैली भगत सिंह के चित्रो व रंग–बिरंगे कपड़ों व प्लेकार्डों पर साम्राज्यवाद के विरुद्ध लिखे नारों से सुसज्जित थी।
प्रदर्शनकारी जोश–खरोश के साथ नारे लगा रहे थे कि ‘मनमोहन सरकार, भगत सिंह का अपमान करना बन्द करो’, ‘भारत–अमेरिकी परमाणु संधी रद्द करो’, ‘भारत में विदेशी कम्पनियों का स्वागत बन्द करो’, ‘भारत की अमेरिका के साथ रणनीतिक दोस्ती बन्द करो’, ‘अमेरिकी सरकार दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन है अमेरिकी सरकार का विनाश हो’, ‘अमेरिका तेरी कब्र खुदेगी, एशिया की धरती पर’, ‘खेती में विदेशी कम्पनियों के प्रवेश पर रोक लगाओ’, ‘किसानों के कर्जे माफ करो’, ‘गांवों की जमीन विशेष आर्थिक क्षेत्रो में देना बन्द करो’, ‘अनाज की पारम्परिक खेती को उजाड़ना बन्द करो’, ‘विदेशों से गल्ला आयात बन्द करो, किसानों को अच्छा दाम दो’, ‘न्यूनतम खेत मजदूरी रुपये लागू करो’, ‘सबको नौकरी, सबको राशन लागू करो’, ‘किसानों को नहीं, विदेशी कम्पनियों को विस्थापित करो’, ‘किसान देश के नागरिक हैं, विदेशी सिफर् लुटेरे हैं,’ ‘वैट कानून रद्द करो’, ‘शॉपिंग मालों पर रोक लगाओ’, ‘सेज कानून रद्द करो’, ‘छोटे दुकानदारों व गांव के घरों से बिजली के बिल की वसूली बन्द करो’ आदि।
इससे पहले मण्डी में जनसभा में वक्ताओं ने बताया कि भगत सिंह का गांधी के साथ विवाद इस बात पर केन्द्रित था कि भारत में अंग्रेजों का शासन मूलत: भारत के बड़े पूंजीपति और बड़े जमींदार चला रहे हैं, जो नहीं चाहते कि भारत के किसान और मजदूर आजाद हो सकें। इन्हीं को भगत सिंह ने काला अंग्रेज बताया था। आज भी यही वर्ग भारत में विदेशी कम्पनियों की वकालत कर रहे हैं, लुटेरों को देश का दोस्त बता रहे हैं और चारों ओर मेहनतकशों की तबाही की स्थिति पैदा कर रहे हैं। जड़ में है बड़ी कम्पनियों, विदेशियों, बड़े जमींदारों, दलालों, ठेकेदारों व माफिया तंत्रा के हाथों में जमीन, पहाड़, नदी, खदान, व्यापार, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का केन्द्रित हो जाना जिसके कारण लोगों की पहुंच से कमाई के साधन छिनते जा रहे हैं और कम्पनियों का व्यापार बढ़ता जा रहा है।
सभा व रैली में भाग लेने वालों में प्रमुख लोग थे भाकपा (माले)–न्यू डेमोक्रेसी के राज्य सचिव का0 आशीष मित्तल, साम्राज्यवाद–विरोधी जनमंच के संयोजक श्री विजय चितौरी, पार्टी जिला सचिव का0 हीरालाल, ए0आई0के0एम0एस0 जिला महासचिव का0 सुरेश, का0 वी0पी0 पटेल, का0 रामकैलाश, का0 राजकुमार, का0 मकबूलशाह, का0 विजय, का0 रेखा, राजकुमारी, नगीना, परिवर्तन सांस्कृतिक मंच के का0 मुन्ना ‘राही’, भैयालाल पटेल, प्रेम, कामता आदि।
दिल्ली : भगत सिंह की जन्मशती के अवसर पर सी0पी0आई0 (एम0एल0)–न्यू डेमोक्रेसी की दिल्ली कमेटी ने मंडी हाउस से संसद मार्ग तक एक जुलूस निकाला जिसका मुख्य नारा था साम्राज्यवाद के दलालों के राज को उखाड़ने के लिए नवजनवादी क्रांति को तेज करो। भगत सिंह के उद्धरणों तथा साम्राज्यवाद–परस्त नीतियों के खिलाफ नारों के प्लेकार्ड लिए पार्टी कार्यकर्ता जुलूस में चले। भगत सिंह का चित्रा लिए आरोही के साथी क्रांतिकारी गीत गाते चल रहे थे। रैली में युवाओं का बाहुल्य था। रैली कनाट प्लेस से होते हुए जंतर–मंतर पहुँची।
जंतर–मंतर पहुँचकर जुलूस सभा में बदल गया। सभा को सम्बोधित करने वालों में पार्टी नेताओं के अलावा हिन्दी के प्रसिद्ध कवि पंकज सिंह भी शामिल थे। उत्तरी दिल्ली से मार्च करके आया युवाओं का दल भी सभा में शामिल हुआ जो भगत सिंह के जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की मांग कर रहा था। सभा से पूर्व सप्ताह में विभि क्षेत्रो में सभाएं कर सरकार की साम्राज्यवाद–परस्त नीतियों की आलोचना की गई।
आन्र प्रदेश : पार्टी की आन्र प्रदेश राज्य कमेटी के आवाह्न पर भगत सिंह की जन्मशती के अवसर पर से सितम्बर तक सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किये गये। इनके तहत व सितम्बर को सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम किये गये। खम्मम में आयोजित कार्यक्रम में से अधिक लोगों ने भाग लिया। सभी जिला मुख्यालयों पर किए गये कार्यक्रमों में अच्छी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
उड़ीसा : भगत सिंह जन्मशती के अवसर पर छात्रों व युवाओं ने गंजाम जिले में सितम्बर से सितम्बर तक एक साइकिल रैली निकाली। इस क्रम में सरोडा, बडगढ़, मानिकपुर, देंगड़ी, कोंकराडा, केंदुपादर, खत्रिायारपुर आदि स्थानों पर स्कूलों में सभायें हुईं तथा शेरगढ़, कोंकराडा, अस्का तथा भार्जनगर में जनसभायें की गईं जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। सभाओं को लोकपख्य के संयोजक श्री राजेन्द्र षडंगी, भगत सिंह स्मृति समिति के संयोजक प्रो0 नीलमणि साहू तथा एडवोकेट भगवान साहू के साथ–साथ लोक संग्राम मंच व सी.पी.आई. (एम–एल)–न्यू डेमोक्रेसी के नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने भगत सिंह के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष में आने का आवाह्न किया। भार्जनगर में स्थानीय बार एसोसियेशन ने रैली का स्वागत किया।
सितम्बर को गजपति जिले के मुख्यालय परलखमंडी में एक जनसभा आयोजित की गयी जिसमें काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया। सभा को श्री राजेन्द्र षडंगी, एडवोकेट उपेन्द्र नायक, एडवोकेट शिव पाणिग्रही तथा अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
भगत सिंह की जन्मशती पर देश भर में व्यापक पैमाने पर कार्यक्रम किये गये। कम्युनिस्ट क्रान्तिकारी संगठनों ने इसमें काफी पहलकदमी ली। केवल भारत में ही नहीं, पाकिस्तान में भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किये गये। पाकिस्तान में पंजाब राज्य सरकार ने भगत सिंह के विरुद्ध दर्ज केस में उनके नाम से आपराधी हटाकर देशभक्त दर्ज किया। परन्तु आज भी भारत में पंजाब के बंगा थाने में भगत सिंह का नाम आपराधी के रूप में दर्ज है। उपमहाद्वीप के बाहर भी कनाडा, इंग्लैण्ड तथा अन्य देशों में भगत सिंह की जन्मशती पर कार्यक्रम किये गये।
भगत सिंह की जन्मशती पर कार्यक्रमों में जनता की व्यापक भागीदारी इसलिए और भी उल्लेखनीय है कि देश के शासक वर्ग साम्राज्यवाद, विशेषकर अमेरिकी साम्राज्यवाद, के सामने समर्पण में काफी आगे बढ़ चुके हैं। देश की जनता शासकों के साम्राज्यवाद–परस्त चरित्रा को अधिकाधिक पहचान रही है तथा इनके खिलाफ संघर्षों में आगे आ रही है। भगत सिंह व अन्य देशभक्त शहीद जनता की साम्राज्यवाद–विरोधी आकांक्षाओं का प्रतीक बन गये हैं।
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