पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड के विभाजन, स्वास्थ्य केन्द्रों व गांवों में पीने के पानी की आपूर्ति को जिला परिषद को सौंपने तथा स्कूलों को भारती एयरटेल को देने के विरुद्ध पंजाब में व्यापक जनाक्रोश है। निजीकरण के इन कदमों के खिलाफ पंजाब में संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। 17 जन संगठनों के मोर्चे, जिसमें इफ्टू, पेंडू मजदूर यूनियन तथा कीर्ति किसान यूनियन (ए.आई.के.एम.एस.) शामिल हैं, ने संघर्ष का ऐलान किया है। फिलहाल यह संघर्ष पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड के विभाजन तथा स्कूलों के निजीकरण के खिलाफ केन्द्रित है।
जन संगठनों के आवाह्न पर 6 दिसम्बर, 2007 को चंडीगढ़ में एक विशाल प्रदर्शन किया गया जिसमें 20 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए जन संगठनों के नेताओं ने इन मुद्दों पर निर्णायक संघर्ष की घोषणा की। इसके अगले कदम के रूप में 24 दिसम्बर को जिला आयुक्तों को चेतावनी–पत्रा दिया जाना है। जनवरी 2008 में जनता को गोलबंद करने के लिए गांव–गांव जत्था मार्च निकाले जाएंगे। 31 जनवरी को जिला आयुक्तों का घेराव किया जाएगा।
इस संघर्ष के भावी कार्यक्रम में 21 फरवरी, 2008 को पंजाब बंद के आवाह्न का निर्णय लिया गया है। संघर्ष के कार्यक्रम ने जनता के बीच उत्साह का संचार किया है।