December 24, 2007...4:20 pm
पोस्को के समर्थन में उड़ीसा सरकार द्वारा किसानों पर हमला
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में सी.पी.एम. सरकार द्वारा विस्थापन का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस, पार्टी कार्यकर्ताओं तथा गुण्डों के संयुक्त हमले का अनुसरण करते हुए उड़ीसा की बीजद–भाजपा नवीन पटनायक सरकार ने कोरियाई कम्पनी पोस्को के इस्पात संयंत्रा की स्थापना, जिसे विशेष आर्थिक क्षेत्रा का दर्जा दिया गया है, से विस्थापित होने वाले किसानों के प्रतिरोध को कुचलने के लिए पुलिस, बीजद कार्यकर्ताओं तथा माफिया तत्वों द्वारा संयुक्त हमला आयोजित कराया। सी.पी.एम. की तर्ज पर बीजद कार्यकर्ताओं की ओर से `पोस्को समर्थकों का संगठन’ बनवाया गया तथा इन समर्थकों के नाम पर पुलिस व गुण्डों ने पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति में संगठित किसानों पर हथियारों से हमला किया।
भारत में अब तक के सबसे बड़े विदेशी पूंजी निवेश के रूप में प्रचारित पोस्को योजना देश के खनिज संसाधनों के दोहन के लिए स्थापित की जा रही है। पोस्को योजना के तीन अंग हैं : इस्पात संयंत्रा, लोहा खनिज के लिए खदानें तथा एक निजी बंदरगाह। इस्पात संयंत्रा की स्थापना के लिए जगतसिंहपुर जिले के इरासमा ब्लाक की तीन ग्राम पंचायतों ढिंकिया, नौगांव व गढ़कुजंग की लगभग 4,500 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जानी है। क्षेत्रा की उपजाऊ जमीन, जिसमें पान की खेती होती है, पर आश्रित हजारों किसान परिवार भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं तथा पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के झण्डे तले संगठित हैं।
पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति भूमि अधिग्रहण के विरोध के क्रम में पोस्को के अधिकारियों द्वारा सर्वे का विरोध करती रही है तथा अनेकों बार इसको रोका गया है। संघर्षरत किसानों ने पोस्को द्वारा जमा किये गये किराये के गुण्डों का सामना किया है। इस संघर्ष के क्रम में प्रभावित गांवों को जोड़ने वाले बालितुठा चौक पर धरना स्थापित किया गया जहां सैकड़ों की संख्या में किसान लगातार मौजूद रहते थे।
20 नवम्बर, ‘07 को उड़ीसा सरकार ने पुलिस बल, बीजद कार्यकर्ताओं तथा गुण्डों द्वारा बालितुठा चौक पर हमला कराया। इसके एक सप्ताह पहले 22 नवम्बर को नौगांव में महंत पर पोस्को–विरोधियों द्वारा तथाकथित हमले को प्रचारित कर जनता को विभाजित करने का प्रयास किया गया। बीजद के प्रमुख नेता, पूर्व मंत्री व स्थानीय विधायक दामोदर राऊत ने पोस्को की स्थापना की कमान संभाली। सरकार व पोस्को की ओर से घोषणा की गई कि 1 अप्रैल, 2008 तक काम शुरू कर दिया जायेगा। पारादीप बंदरगाह से जुड़े शासक पार्टियों द्वारा संरक्षित माफिया गिरोहों को भी इस काम में लगाया गया। 29 नवम्बर को हथियारों से लैस लगभग 1000 गुण्डों ने बालितुठा चौक पर ारने पर बैठे किसानों पर हमला किया। अनेक किसानों को गंभीर चोटें आईं। गुण्डों ने धरनास्थल पर टैन्ट को आग लगा दी। इस हमले के 10 मिनट के भीतर पुलिस ने बालितुठा चौक पहुंचकर धरनास्थल पर पुलिस कैम्प की स्थापना कर दी। गुण्डों द्वारा हमले के लगभग साथ ही पुलिस का दल–बल के साथ पहुंचना स्पष्ट करता है कि यह हमला नवीन पटनायक सरकार द्वारा आयोजित कराया गया था।
इस हमले के साथ ही पुलिस व गुण्डों ने नौगांव पंचायत तथा ढिंकिया पंचायत के गोविंदपुर गांव में घुसकर पोस्को का विरोध करने वाले किसानों को पीटना तथा आतंकित करना शुरू कर दिया। पोस्को का विरोध करने वाले किसानों पर दण्ड लगाना शुरू कर दिया तथा एक रिपोर्ट के अनुसार पोस्को– विरोधी किसानों से 5000 रु। प्रति परिवार जुर्माना वसूल करना शुरू कर दिया। नौगांव व गोविन्दपुर का ढिंकिया से सम्पर्क काट दिया तथा ढिंकिया की नाकेबंदी कर दी। पुलिस–बीजद–गुण्डों के आतंक राज के बावजूद नौगांव व गोविन्दपुर के अधिसंख्य किसान पोस्को के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में हैं तथा पोस्को प्रतिरोध संग्राम कमेटी के साथ खड़े हैं। पुलिस–बीजद–गुण्डों के हमले ने स्पष्ट किया कि नवीन पटनायक सरकार विदेशी कम्पनी की सेवा में किसानों का दमन करने के लिए किसी हद तक भी जा सकती है।
नौगांव, गोविंदपुर पर पुलिस–गुण्डों के कब्जे के बाद इन गांवों के रास्तों को बंद कर दिया गया। क्षेत्रा में जाने वाले जांच दलों को पुलिस–गुण्डों द्वारा रोका जा रहा है। पुलिस क्षेत्रा में, विशेषकर ढिंकिया जाने वाले, सभी वाहनों को रोकती है तथा उन्हें गुण्डों के हवाले कर देती है। `पोस्को समर्थक’ गुण्डे पुलिस के संरक्षण में क्षेत्रा पर `नियंत्राण’ कर रहे हैं। 11 दिसम्बर को जनहस्तक्षेप के जांच दल तथा इसके पहले व बाद में कई दलों को इस प्रकार रोका गया।
दरअसल नवीन पटनायक सरकार की योजना नौगांव, गोविंदपुर को पुलिस–गुण्डा नियंत्राण में रखकर ढिंकिया की नाकेबंदी कर पोस्को के विरोध को तोड़ना है। सरकार पुलिस–गुण्डा वाहिनी के द्वारा `सर्वे’ का काम शुरू करवाकर ढिंकिया के संघर्षरत किसानों की इच्छाशक्ति को तोड़ना चाहती है तथा ऐसा करके ढिंकिया को भी पुलिस–गुण्डों के नियंत्राण में लाकर पोस्को की स्थापना के लिए किसानों को विस्थापित करना चाहती है। परन्तु तमाम जन– विरोधी सरकारों की तरह नवीन पटनायक सरकार भी किसानों की संघर्ष क्षमता को कम करके आंक रही है। पुलिस–गुण्डों के नियंत्राण के बावजूद वह नौगांव व गोविंदपुर के किसानों की इच्छाशक्ति को तोड़ने में विफल रही है तथा ढिंकिया के किसानों की संघर्ष क्षमता को तोड़ने में भी विफल रही है।
29 नवम्बर, ‘07 के नवीन पटनायक सरकार द्वारा आयोजित पुलिस–बीजद–गुण्डा हमले की उड़ीसा तथा देश भर में व्यापक निंदा हुई। उड़ीसा में बुद्धिजीवियों व जनवादी संगठनों ने नवीन पटनायक सरकार की तीव्र आलोचना के साथ नाकेबंदी के शिकार ढिंकिया में राहत के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाने के प्रयास किये।
ढिंकिया तथा अन्य प्रभावित गांवों की किसान जनता नवीन पटनायक सरकार के हमले का मुकाबला करने के लिए संकल्पबद्ध है। वह किसी कीमत पर भी अपनी जमीन व आजीविका के साधनों को नहीं छोड़ना चाहती।
दरअसल, पोस्को योजना न केवल स्थानीय किसानों बल्कि उड़ीसा व देश के हितों के खिलाफ है। पोस्को योजना खनिज दोहन पर आधारित सबसे बड़ी योजना है। 120 लाख टन के इस्पात संयंत्रा के लिए 60 करोड़ टन लौह खनिज मुहैया कराने का प्रस्ताव है। 51,000 करोड़ रु. की प्रस्तावित लागत की इस योजना में पोस्को को मात्रा लौह खनिज से 96,000 करोड़ रुपये का लाभ होगा। विशेष आर्थिक क्षेत्रा का दर्जा होने के कारण कम्पनी को करों से राहत मिलेगी तथा घरेलू बाजार से मुक्ति।
संयंत्रा को पानी आपूर्ति सुनिश्चित कराई जायेगी जिससे कटक तथा भुवनेश्वर जैसे शहरों को पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी। निजी बंदरगाह से पानी की निकासी तथा वातावरण पर कुप्रभावों के साथ–साथ मुछआरों की आजीविका भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होगी। योजना में 13,000 नौकरियों का लालच दिया जा रहा है जबकि प्रभावित जमीन पर लगभग 10,000 किसान परिवार आश्रित हैं। जमीन बेहद उपजाऊ है पर सरकारी रिकार्ड में अधिकांश जमीन बंजर व वन भूमि के रूप में चिन्हित है। तथाकथित पोस्को समर्थकों से बातचीत में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि `सरकारी’ जमीन पर मुआवजा नहीं दिया जा सकता जिसके विरोध में उक्त समर्थक भी बैठक का बहिष्कार करने को बाधः हुए।
पोस्को योजना उड़ीसा तथा देश के हितों के खिलाफ है, फिर भी मनमोहन सिंह सरकार व नवीन पटनायक सरकार इसको लागू करवाने के लिए उतावले हैं। पोस्को के अनुसार काम शुरू होने से पहले ही वह 250 करोड़ रु. खर्च कर चुकी है। नवीन पटनायक तथा मनमोहन सिंह के पोस्को–प्रेम की शायद यह कुंजी है। जब काम शुरू होने से पहले ही इतनी राशि व्यय की जा चुकी है तो कुल राशि का अंदाजा लगाया जा सकता है। देश की संपदा की लूट में दलाल विदेशी कम्पनी के साथ हैं।
सीपीआई तथा सीपीएम नेताओं को भी पोस्को योजना के देश–विरोधी चरित्रा से परहेज नहीं है। गुरदास दासगुप्ता व प्रकाश करात पोस्को को देश से भगाने की जगह योजना के स्थान परिवर्तन की बात कर पोस्को द्वारा देश के खनिज दोहन का समर्थन कर रहे हैं। वे देश की लूट तथा शोषण में हिस्सा बांटने को आतुर हैं।
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