December 30, 2007...1:06 am

सी पी एम सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण-विरोधी किसानों पर फासीवादी हमला

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हमने उन्हीं के सिक्कों में हिसाब चुका दिया है बुद्धदेव भट्टाचार्य नंदीग्राम में सी.पी.एम. काडरों, गुण्डों . बंगाल पुलिस की हाल की उपलबियों पर फूले नहीं समा रहे हैंदूसरी ओर, सी.पी.एम. महासचिव जानना चाहते हैं कि जब वहां रासायनिक कम्पनियों का अड्डा बनना ही नहीं है तो भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी लड़ क्यों रही है? साथ ही वे कहते हैं कि सी.पी.एम. काडर पुलिस ने जो किया वह अनिवार्य था क्योंकि इलाके में माओवादी घुसे हुए हैं तथा मनमोहन सिंह कहते हैं कि माओवादी देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हैंसी.पी.एम. के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी बताते हैं कि यह इलाका बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को तो जाना ही नहीं था, यह तो रासायनिक अड्डे के लिए जाना था

किसी भी सी.पी.एम. नेता का यह मानना नहीं है कि मार्च 2007 की हिंसा या मौजूदा दौर की हिंसा जिसमें पुलिस सशस्त्रा गुण्डे एकजुट होकर भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी के सदस्य आम किसानों पर हमले करते रहे, महिलाओं से बलात्कार करते फिरे, मारमार कर गांव से लोगों को भगा दिया गलत था

दूसरा, जैसा प्रकाश करात ने मार्च 2007 में ही स्पष्ट किया, सी.पी.एम. का कहना है कि किसानों की उपजाऊ जमीनों का जबरन धिग्रहण करना सही है तथा जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे `नरोदनिकहैंकरात भट्टाचार्य के उस समय के बयानों का तात्पर्य यह है कि सी.पी.एम. बंगाल का `औद्योगिकरणकरने में लगी है तथा इसके दौरान किसानों को कुछ कुर्बानी तो करनी ही होगी क्योंकि बंगाल की लगभग सारी जमीन ही उपजाऊ है

इस बार का हिंसक दौर

हालांकि बुद्धदेव भट्टाचार्य ने मार्च 2007 की हिंसा के बाद नंदीग्राम के भूमि धिग्रहण नोटिसों को रद्द करने की बात की, पर सच्चाई यही है कि हकीकत में यह अभी भी रद्द नहीं हुआ हैतब से लेकर नवम्बर तक, विशेषकर पिछले एक महीने से, लगातार छिटपुट हिंसा नंदीग्राम में चल रही थीसाथ ही सी.पी.एम. नेताओं, विशेषकर सी.पी.एम. पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, की शिकायत थी कि भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी ने सी.पी.एम. समर्थक कार्यकत्र्ताओं को गांव से खदेड़ दिया है और वे बेघर हो गये हैं

मनमोहन सरकार पर अपने दबाव का पूरा फायदा उठाते हुए सी.पी.एम. ने पूरी तैयारी कर बंगाल के अन्य इलाकों से काडर एकत्रा कर उन्हें हथियारों से लैस कर . बंगाल सरकार के संरक्षण में नंदीग्राम पर पुन: कब्जा जमाने के लिए घुसायाइसी तरह उसने मार्च में भी इर्दगिर्द से काडर बुलाये थे, उन्हें हथियार दिये थे, पुलिस साथ दी थी इलाका सील किया था और हिंसा की थीपरन्तु उस समय मौतों के बावजूद किसानों का प्रतिरोध जारी रहा थापर, इस बार सी.पी.एम. ने नये तरीके अपनायेभूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी के कार्यकर्ताओं का अपहरण कर उन्होंने कई सौ ऐसे लोगो को बांध कर आगे चलाया और पीछे से फायरिंग की ताकि किसान प्रतिरोध करने से रूकें क्योंकि उनके अपने लोगों को चोटें सकती थींइस बार घर जलाने सामान लूटने की कार्रवाई का व्यापक इस्तेमाल हुआतीसरा, महिलाओं पर लैंगिक हिंसा का दौर इस बार तीव्र रहासिंगुर में पूरी हिंसा के दौरान एक बलात्कार और हत्या तापसी मलिक की; जबकि मार्च 2007 के दौर में नंदीग्राम में 33 महिलाओं ने सी.पी.एम. काडर पर बलात्कार के आरोप लगाये और अस्पताल में दाखिल हुईंपरन्तु इस बार ऐसी कई घटनायें हुईं, और वह भी सामूहिक बलात्कारों की! और भी हैरतनाक बात यह है कि नंदीग्राम हिंसा के दौरान ही सी.पी.एम. की महिला संगठन `एडवाकी अखिल भारतीय कानंफ़्रेंस चल रही थी और उसमें `महिलाओं पर हिंसाके खिलाफ विशेष कदमों की मांग की गई!

पुलिसगुण्डे गांव के गांव खाली कराते गये तथा प्रैस अन्य ताकतों के लिए इलाके को सील कर दिया गयाकरात साहब को माओवादियों और लैंडमाइनों की खबरें मिलने लगीं मनमोहन सिंह के बयान याद आने लगे, जबकि बंगाल के गृह सचिव ने बाद में बयान दिया कि इलाके में कोई माओवादी नहीं हैंगांवों से लोगों के भागने नंदीग्राम के स्कूल पर 20 हजार शरणार्थियों के पहुंचने की खबरें 9 नवम्बर से लगातार फायरिंग की आवाजों के साथ आने लगीं और 10 नवम्बर को आमगाचिया पर बड़े गोलीकाण्ड में पुलिस सी.पी.एम. फायरिंग में 5 लोग मारे गये कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए। 10 नवम्बर को ही परेशान राज्यपाल ने बयान दिया कि गृह सचिव के अनुसार इलाके `युद्ध क्षेत्राबन गये हैं उन्होंने किसानों पर हमलों की निंदा की

12 नवम्बर को सी.आर.पी.एफ. पहुंची, परन्तु 1000 सी.आर.पी.एफ. को सी.पी.एम. काडरों ने इलाके में घुसने नहीं दियाजन धिकार कार्यकर्ताओं, राहतसामग्री विपक्षी दलों के नेताओं के लिए भी इलाका बंद कर दिया गयागांवों से किसानों को भगाकर पूर्व धिग्रहण होने वाले इलाकों में साटा व्याप्त होने के बाद ही सोमवार 12 नवम्बर को इलाका खोला गया प्रैस को जाने दिया गया, जिसने खबर दी कि गांव वीरान हैं, लोग नंदीग्राम स्कूल में एकत्रा हैं खेतों में छुपे हैं, अस्पताल घायलों से भरे हैं, औरतें बलात्कार की शिकायत कर रही हैं, शरणार्थियों के लिए कोई राहत नहीं, खाना नहीं है, दवाई नहीं हैतब से इलाके में मोटरसाईकिलों पर सी.पी.एम. काडर पहरा दे रहे हैं, सी.आर.पी.एफ. को घूमने दे रहे हैं, घरों के दरवाजे बंद करने पर प्रतिबंध हैं, फसल काटने पर प्रतिबंध है, गांव में रहने के लिए हजारों रुपये के जुर्माने लिये जा रहे हैं। 13 नवम्बर को विपक्षी दलों के द्वारा अस्पतालों का दौरा करने के पहले धिकतर घायलों को सी.पी.एम. ने वहां से भगा दिया

बंगालविरोध
12 नवम्बर को लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने बंगाल बंद का एलान किया बंगाल बंद रहा। 14 नवम्बर को बंगाल के कलाकारों के नेतृत्व में जो उससे पहले तीन दिन से हिंसा का प्रतिरोध जता रहे थे एक विशाल जुलूस कोलकाता में निकाला गया जिसमें हजारोंहजार लोगों ने स्वत:स्फूर्त रूप से भाग लियाकलाकारों ने प्रतिरोध जताने के लिए अपनी फिल्में कोलकाता में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह से वापस ले समारोहस्थल के बाहर प्रदर्शन किया, जहां प्रसिद्ध कलाकारों पर बंगाल पुलिस ने लाठीचार्ज कर, केस बनाकर उन्हें लाल बाजार थाने में डाल दिया

सी.पी.एम. प्रतिक्रिया

सी.पी.एम. की ओर से बुद्धदेव भट्टाचार्य के अलावा प्रकाश करात सीताराम येचुरी मुख्य प्रवक्ता रहे और अपनी पार्टी के द्वारा आयोजित, लागू की गई नेतृत्व दी गई हिंसा के नंगे नाच को उचित बताते रहेउनके बयानों में कुछ मुद्दे तय थे उन्होंने सी.पी.एम. काडरों की हिंसक भूमिका से इंकार नहीं किया बल्कि उसको ठीक बताया और यह कहा कि वहां `अकेलेसी.पी.एम. ने हिंसा नहीं कीप्रकाश करात तो माओवादियों का भूत खड़ा करते रहेभट्टाचार्य ने भी कहा कि वे हैं परन्तु उनका मुख्य निशाना तृणमूल भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी थी तथा वे स्पष्टत: बदले की भावना से प्रेरित थेप्रकाश करात की बातों पर टिप्पणी करते हुए एक प्रसिद्ध बंगाली लेखक ने कहा कि उनकी बात बुश जैसी है जिन्हें इराक में जनसंहारक हथियार दिखते थे

सी.पी.एम. से जुड़े कई बुद्धिजीवियों जैसे प्रभात पटनायक, जयती घोष, उत्सा पटनायक आदि, जो केन्द्र सरकार में सी.पी.एम. की भूमिका का लाभ उठा रहे हैं सरकारी कमेटियों की सीटें गर्म कर रहे हैं, ने संयुक्त बयान में पूछा कि जब रासायनिक अड्डा नंदीग्राम से हटा दिया गया तो हिंसा की जरूरत क्यों रही ? यह बात तो उन्हें बुद्धदेव से पूछनी चाहिए उनके बयानों से समझना भी चाहिए कि क्यों नंदीग्राम के किसानों को डर था कि मौका मिलते ही सी.पी.एम. उनके प्रतिरोध को कुचलेगी जबरन धिग्रहण करेगी

नंदीग्राम क्यों जला? उसका समर्थन क्यों?

नंदीग्राम आन्दोलन सी.पी.एम. नेतृत्व की `वाममोर्चा सरकार द्वारा इलाके में भूमि धिग्रहण करने की योजना उनके द्वारा भूमि धिग्रहण नोटिस देने के बाद उभराबंगाल के किसानों ने सिंगुर में विरोध करते किसानों को हाल में देखा था और इसलिए नंदीग्राम ने शुरू से पूरी तैयारी के साथ प्रतिरोध कियाभूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी बनायी गयी जिसमें तृणमूल जमातउलेमा हिन्द के नेता भी शामिल थे बहुत से ऐसे लोग भी शामिल थे जो सी.पी.एम. समर्थक थे पर जमीन नहीं देना चाहते थेसी.पी.एम. नेताओं के तरीके जानते हुए उन्होंने शुरू से ही इलाके में आने वाले रास्ते सील कर दिये पुलिस के आगमन पर प्रतिबंध लगायाफिर भी, रास्ते के दूसरी तरफ से फायरिंग करते सी.पी.एम. के लोगों ने लोगों को घायल कर, पुराने समर्थकों को पकड़ कर उन्हें ब्राण्ड किया मार्च की फायरिंग में 14 व्यक्ति मारे जिनमें 13 पुराने सी.पी.एम. समर्थक थेसी.पी.एम. के राज में रहने वाले सभी गांववासी जानते हैं कि सी.पी.एम. पूरे के पूरे ग्रामवासियों पर किस तरह धाक जमाती हैइसलिए बुद्धदेव ने जब कहा कि सी.पी.एम. पंचायत नेताओं अन्य सी.पी.एम. नेताओं को बी.यू.पी.सी. ने इलाके से बाहर निकाला है, तो यह तो स्पष्ट तथ्य है जिससे नंदीग्राम आन्दोलन इंकार नहीं कर रहा हैइलाका सी.पी.एम. के हुक्म को इंकार कैसे करेगा अगर वह सी.पी.एम. काडर, गुण्डे पुलिस से लड़ेगा नहीं ?

नंदीग्राम की जमीन इंडोनेशिया के कम्युनिस्टविरोधी सलीम ग्रुप को देने के लिए हथियाई जा रही थीबुद्धदेव साहब ने सलीम के आला अफसरों के साथ संयुक्त प्रैस कानंफ़्रेंस में भाग भी लिया, समझौते पर हस्ताक्षर भी कियेउन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे `कट्टरपंथी माक्र्सवादसे मुक्त हैंचाहे सलीम इलाके को रासायनिक अड्डा बनाता या कुछ और, वह दिया जा रहा था एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी कोसीपी.एम. का सारा गुस्सा नंदीग्राम के किसानों के प्रति इस बात पर केन्द्रित है कि सलीम ग्रुप की सेवा में उन्होंने अड़चन खड़ा किया, और यह कोई अजीब बात नहीं होगी अगर किसानों को जबरन उखाड़ने में सी.पी.एम. सफल हो जाये तो पुन: शिक्षा के नाम पर यह कह कर कि लोग `समझगये हैं, वह अब भी जमीन सलीम ग्रुप को ही देगी

संसदवादी रास्ते का यही हश्र है

असल में नंदीग्राम ने `संसद के जरिये बदलावके भ्रम को बेनकाब कर दिया है और उसके असली चेहरे को बेनकाब कर दिया हैयही उसकी सबसे बड़ी देन हैसी.पी.एम. शासक वर्गीय पार्टी है फासीवादी दमन करने में माहिर हैजिस तरह काडर, पुलिस सत्ता की ताकत को लड़ती जनता के खिलाफ इस्तेमाल किया गया है, उसी तरह तो गुजरात में मोदी