झूठे चुनावी वायदों की पोल खुलने पर हरियाणा प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध जनाक्रोश दिनों–दिन बढ़ रहा है। बिजली सप्लाई व्यवस्था महीनों से बुरी तरह चरमरा चुकी है। प्रतिदिन औसतन 17–18 घंटे पावर कट रहता है। बिजली आने–जाने का कोई वक्त तय नहीं है। विकसित राज्य का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी के शासन में हरियाणा की जनता अंधेरे में रह रही है। शासक पार्टी के समर्थक रहे फैक्ट्री मालिकों का धैर्य भी जवाब दे रहा है। इस बिजली संकट की सबसे ज्यादा मार आम जनता, विशेषकर मजदूर वर्ग, पर पड़ रही है। पानीपत के टैक्सटाईल उद्यमियों ने पावरलूम श्रमिकों की मजदूरी के पीस रेट घटा दिये हैं। वे जनरेटर नहीं चलाते जिसके कारण घंटों तक पावरलूम श्रमिक बिना वेतन खाली बैठे रहते हैं। अगर जेनरेटर चलाया जाता है तो उसके डीजल का खर्च कामगारों के पीस रेट से घटाया जाता है। न तो सुबह फैक्ट्री जाते समय और न ही रात को वापिस क्वार्टर पर लौटने पर लाईट मिलती है।
पानीपत टैक्सटाईल उद्योग के उद्यमियों के संगठनों ने इसी बिजली संकट के विरुद्ध अचानक 8 फरवरी को औद्योगिक हड़ताल व बिजली दफ्तर पर प्रदर्शन का आवाह्न किया। इफ्टू जिला पानीपत कमेटी ने इस मुद्दे का समर्थन किया। इफ्टू के आवाह्न पर करीब 700 पावरलूम श्रमिकों ने हाथों में इफ्टू के झंडे–बैनर थामे सरकार के विरुद्ध नारे लगाते हुए जुलूस निकाला। गोहाना रोड मुख्य पावर हाउस पर सभा कर इफ्टू की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भिजवाया गया और 24 घंटे निर्बाध पावर सप्लाई की मांग की गई।
हालांकि पुलिस अच्छी संख्या में शहर में फैली हुई थी, उन्होंने इफ्टु की इस रैली को रोकने या बिखरने की चंष्टा नही की, क्योंकि यह मालिकों के खिलाफ नह थी। उधर जबकि सभी मालिकों ने अपनी फैक्ट्रियां तो बंद कर दी, परंतु मालिको की रैली की हालत खस्ता थी व उनकी नेतृत्वकारी कमेटी के लोग ही आपस में लड़ने लगे। हालांकि बहुत सी ट्रेड यूनियनों तथा राजनीतिक पार्टियों ने मुद्दे का समर्थन किया था, केवल इफ्टू ही सफल जन प्रदर्शन कर पाई।
इफ्टू पानीपत जिलायक्ष का. पी.पी. कपूर ने कहा कि हरियाणा की भूपेन्द्र हुड्डा सरकार को प्रदेश में रिलायंस, अम्बानी व होंडा जैसे बहुराष्ट्रीय उद्योगों की दलाली के सिवा कुछ नजर नहीं आता। उन्होंने बिजली निजीकरण की उद्यमी संगठनों की मांग को लघु उद्योग व श्रमिक–विरोधी बताते हुए तीव्र निंदा की। इससे बिजली और महंगी होगी, लघु उद्योग तबाह होंगे व श्रमिक बेरोजगार होंगे। बिजली संकट का प्रमुख कारण बिजली की बढ़ती खपत के अनुरूप बिजली उत्पादन में वृद्धि की व्यवस्था न करना, बिजली विभाग में भ्रष्टाचार व शासक वर्ग की शह पर बड़े उद्योगों द्वारा बिजली की चोरी है। जिन–जिन प्रदेशा में बिजली निगमों का निजीकरण किया गया, वहां निजी बिजली कम्पनियों की लूट व अव्यवस्था से पीडि़त जनता संघर्ष कर रही है।
मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन में इफ्टू ने 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति करने व पीक आवर्स में प्रति यूनिट दो रुपये का लिया जा रहा सरचार्ज तुरन्त समाप्त करने की मांग की व आन्दोलन की चेतावनी दी। हरियाणा सरकार ने 2 रु0 प्रति यूनिट सरचार्ज समाप्त करने का फैसला किया है।