जिला उधमसिंह नगर की काशीपुर तहसील के सभी उद्योगों में बड़े पैमाने पर ठेकेदारी प्रथा लागू है। ये उद्योग कागज निर्माण, बिजली उत्पादों, इंजीनियरिंग, कपड़ा, आदि के है । औद्योगिक क्षेत्रा उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा होने के कारण अधिकतर मजदूर मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा तहसील के गांवों से आते है ।
सूर्या रोशनी लिमिटेड इसी क्षेत्रा में बिजली के बल्ब, ट्यूब लाइट आदि के उत्पाद का बड़ा उद्योग है। इसमें लगभग 1700 मजदूर काम करते ह जिनमें लगभग 500 फैक्ट्री के स्थाई तथा 1200 ठेकेदारी के मजदूर हैं जो श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत 9 ठेकेदारों के मातहत काम करते ह। फैक्ट्री के 500 श्रमिकों की प्रबन्धकों ने एक यूनियन बना रखी है जो प्रबन्धकों की योजनानुसार ही काम करती है। यूनियन के साथ प्रबन्धकों का नियमित मजदूरों के मासिक वेतन वृद्धि का एक समझौता हुआ जिसके बाद ठेकेदारी में काम कर रहे मजदूरों में भी असंतोष उत्पन्न हुआ। अपनी एक गोपनीय मीटिंग करके उन्होंने मजदूरी 200 रुपये दैनिक किए जाने की मांग उठाने की योजना बनाई। ठेकेदार से यह मांग रखने पर कम्पनी ने मजदूरों के मुख्य नेता अमित कुमार गोला को ड्यूटी से रोक दिया। प्रतिक्रिया में लगभग 600 ठेकेदारी मजदूर हड़ताल पर चले गये।
गेट पर पुलिस का दबाव होने पर मजदूर उत्तर प्रदेश की सीमा में एकत्रा हुए। हड़ताली मजदूरों में ज्यादातर ठाकुरद्वारा तहसील के थे। मजदूरों ने ठाकुरद्वारा के क्षेत्रीय बसपा विधायक विजय यादव के पास जाकर अपनी समस्या रखी। दो दिन तक उसके आश्वासनों पर उम्मीद टिकाने के बाद विधायक ने मजदूर नेता से अकेले मिलना चाहा। पार्टी नेताओं की सलाह के अनुसार सभी मजदूरों ने एकत्रा होकर विधायक से मिलना चाहा। इस पर विधायक ने मजदूरों से साफ कह दिया कि समस्या कम्पनी की नहीं है, उन्हें ठेकेदार से बात करनी चाहिए। क्रोधित मजदूरों ने इस बात पर विधायक के विरुद्ध नारे लगाए। इस पूरी प्रक्रिया में पार्टी नेता मजदूरों के साथ बने रहे।
मजदूरों को संगठित ढंग से प्रशासन के समक्ष संघर्ष की दिशा दी गयी पर वे स्थापित प्रतिनिधियो से मदद की उम्मीद लेकर इसके बाद काशीपुर के भाजपा सांसद के पास गए। पर सांसद ने मजदूरों की बात सुनने की जगह उन्हें घर से बाहर निकलवा दिया। इसके बाद ही वे साहस जुटा कर पार्टी नेताओं के दिशा–निर्देशन को अपनाते हुए एस0डी0एम0 कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे। इलाके के कुछ अन्य लोगों ने भी आन्दोलन में सहयोग दिया।
इसी दौरान इफ्टू नेताओं ने वहां पहुँच कर रात में मजदूरों की बैठक की। बैठक में संगठन व कमेटी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, मजदूर वर्ग की राजनीति के सम्बन में चर्चा की तथा मजदूरों का विश्वास हासिल किया। सुबह मजदूरों की आम सभा में एक कमेटी का गठन किया गया, आन्दोलन की दिशा व कदम और समझौते के बिन्दु तय किए गए। आन्दोलन की तैयारी व गतिविधियों की सूचना पाकर एस0डी0एम0 ने रविवार के अवकाश के बावजूद शाम के समय फैक्ट्री प्रबनन, ठेकेदार व श्रम प्रवर्तन अधिकारी को अपने कार्यालय में बुलाकर वार्ता कराई और मजदूरों के साथ सुझाए गये बिन्दुओं पर एक लिखित समझौता हुआ। आन्दोलन के दौरान जिन 20 मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया गया था, उन सभी को ड्यूटी पर लिया गया; हाजिरी कार्ड, वेतन स्लिप, परिचय पत्रा, ई.एस0आई0 कार्ड व पी0एफ0 स्लिप तथा न्यूनतम वेतन दिये जाने की मांगें मानी गयीं।
इसके बावजूद ठेकेदारों ने उपरोक्त 20 मजदूरों को तो ड्यूटी पर ले लिया लेकिन अन्य 30 मजदूरों को ड्यूटी से निकाल दिया और समझौते को लागू नहीं किया। अत: फिर आन्दोलन की तैयारी के लिए मजदूरों के गांवों व कालोनियों में मीटिंगें की गयीं तथा एस0डी0एम0 को पुन: नोटिस दिया गया। बढ़ते आन्दोलन के दबाव में एस0डी0एम0 ने पुन: वार्ता कराई और समस्याएं हल हुईं। मजदूरों की ओर से का0 अमित गोला के अतिरिक्त का0 यूसुफ, आबिद, कैलाश, रमेश, सुरेन्द्र, गोविन्द, नरेन्द्र चौहान, रमेश, विवश आदि ने अग्रणी भूमिका निभाई।
इसी दौरान उधमसिंह नगर जिले की काशीपुर की बगल की तहसील जसपुर की कताई मिल में भी उत्तर प्रदेश राज्य कपड़ा उद्योग निगम (यू0पी0एस0टी0सी0) की पुरानी कताई मिल के मजदूरों का संघर्ष भड़क उठा। इस मिल को व यू0पी0एस0टी0सी0 की काशीपुर की मिलों को उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद अलपस इंडस्ट्रीज को ठेके पर चलाने के लिए दिया गया था। इन दोनों मिलों में क्रमश: 900 व 1200 पुराने मजदूर है जिन्हें प्राथमिकता के तौर पर काम पर रखा गया था। इन मजदूरों की भी 12 घंटे काम, न्यूनतम मजदूरी न मिलना, हाजिरी कार्ड, परिचय पत्रा, वेतन स्लिप, ई0एस0आई0 कार्ड न मिलने की समस्या बनी हुई थी। प्रबंधकों के साथ श्रमिक प्रतिनि धियो के कुछ समय पहले हुए उत्पादन वृद्धि के समझौते के विरुद्ध श्रमिकों में गहरा असंतोष था और ये सभी मजदूर उत्तराखण्ड क्रांति दल के स्थानीय नेताओं से सम्पर्क करके गेट पर भूख हड़ताल पर बैठ गये थे। इसके फलस्वरूप कम्पनी ने दो मजदूरों को ड्यूटी से निकाल दिया जिसकी प्रतिक्रिया में फैक्ट्री में हड़ताल हो गई। हड़ताल के एक सप्ताह चलने के बाद इन मजदूरों ने इफ्टू से सम्पर्क किया।
इफ्टू नेताओं द्वारा एक नई कमेटी का निर्माण करने, मांगें सूत्राबद्ध करने और बड़ी जनसभा संगठित करने के दबाव में एस0डी0एम0 ने रविवार के दिन वार्ता बुलाई और एक त्रिपक्षीय समझौता समपन्न कराया। इसके अन्तर्गत नौकरी व मकानों से निकाले गये सभी 16 मजदूरों को वापस रखा गया। 8 घंटे ड्यूटी, न्यूनतम वेतन, पूर्व के उत्पादन मानकों पर ही उत्पादन देना, हाजिरी कार्ड, वेतन स्लिप, फण्ड स्लिप आदि मांगें स्वीकृत हुईं। कामरेड रामप्रसाद गुप्ता, मिश्रा, श्यामसुन्दर, कन्हैया, सादिक, योगेश व सुरेन्द्र ने मजदूरों का नेतृत्व किया।
इस पूरे इलाके में दसियों हजार मजदूर ठेकेदारी प्रथा के तहत शोषित हो रहे है और 12 घंटे काम करके 70 से 100 रुपये मजदूरी पाते ह। नौकरी से निकाले जाने का डर संघर्ष के कदम को रोकता जरूर है पर सचेत ढंग से संगठित संघर्ष ही ठेकेदारी के खिलाफ मजदूर आंदोलन को आगे बढ़ा सकता है।