April 2, 2008...11:04 pm
सासाराम (बिहार) - जन–विरोधी नीतियों के खिलाफ रैली
बिहार की नितीश–मोदी सरकार के ढाई साल के शासन की किसान–मजदूर–विरोधी नीतियों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। भूमि सुधारों के संदर्भ में गठित बंदोपायाय आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल रखा है। जन वितरण प्रणाली से प्राप्त होने वाले अनाज एवं केरोसीन तेल की मात्रा लगातार घटाई जा रही है। जहां गरीबी रेखा से नीचे (बी.पी.एल.) के लोगों के लिए 45 किलो अनाज को घटाकर 25 किलो कर दिया गया है, वहीं केरोसीन तेल की मात्रा 4 लीटर से घटाकर ग्रामीण क्षेत्रो में 3 लीटर तथा शहरी क्षेत्रो में ढाई लीटर कर दी गई है। कुल मिलाकर जन कल्याण की योजनाओं में बड़े पैमाने पर कटौती की जा रही है। किसानों के लिए सिंचाई के साधनों का प्रबंध तो दूर की बात है, पुराने साधनों की मरम्मत व देखरेख भी नहीं की जा रही है। सोन कमांड की नहरों की हालत जीर्ण–शीर्ण है तथा 30 सालों से अधिक समय से दुर्गावती जलाशय परियोजना आधी–आधूरी लटकी हुई है। कैमूर की तराई में लगातार सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। पूरे रोहतास जिले में, यहां तक कि सासाराम, विक्रमगंज, डेहरी जैसे शहरों में भी बिजली–पानी का तीव्र संकट है। बिजली कनेक्शन का काम बड़े माफियाओं को सौंपा गया है। सरकारी अस्पतालों का प्रबंध भी सरकार ने पिछले कुछ समय से बड़े ठेकेदारों को सौंप दिया है। खाद की आपूर्ति के मामले में लगान–रसीद को आवश्यक बनाकर सरकार ने गरीब किसानों तथा बटाईदारों की खेती को चौपट कर दिया है। इससे धान की फसल काफी प्रभावित हुई है। नितीश–मोदी सरकार ने सुशासन के नाम पर नौकरशाही केन्द्रित शासन को मजबूत किया तथा जनता के आन्दोलनों को कुचलने के लिए पुलिस द्वारा बर्बर सामूहिक दमन किया गया। नौकरशाह, पुलिसतंत्र को मजबूत करना ही नितीश–मोदी की सरकार के शासन की मुख्य उपलब्धि रही है।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी–लेनिनवादी)–न्यू डेमोक्रेसी की रोहतास जिला कमेटी ने जन समस्याओं को लेकर 17 मार्च, 2008 को सासाराम में जनहुंकार रैली का आयोजन किया जिसमें 1500 से अधिक लोगों ने भाग लिया। भूमि सुधार लागू कराने, ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 100 दिन का रोजगार मुहैया कराने, खाद–पानी–बिजली की आपूर्ति, पुलिस दमन व सामंती उत्पीड़न रोकने, महंगाई व भ्रष्टाचार का विरोध रैली के मुख्य सवाल थे। लाल झंडों तथा बैनरों से सुसज्जित रैली दिन के 1 बजे रेलवे मैदान से शुरू हुई तथा पंक्तिबद्ध रूप में शहर की मुख्य सड़क जी.टी. रोड होते हुए बाल विकास विद्यालय के प्रांगण में पहुंचकर जनसभा में बदल गई। जनसभा की अयक्षता ए.आई.के.एम.एस. के जिला अयक्ष का. शंकर सिंह तथा संचालन पार्टी के जिला प्रवक्ता का. अयोध्या राम ने किया। सभा का आरंभ क्रांतिकारी गीतों से हुआ।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता इण्डियन फैडरेशन आफ़ टे्रड यूनियंस (इफ्टू) के राष्ट्रीय अयक्ष का. पल्टू सेन ने जंगल की आग की तरह बढ़ रही महंगाई के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों की जन–विरोधी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। केन्द्र में सत्तारूढ़ सी.पी.एम. समर्थित कांग्रेस गठबंधन तथा इसके पूर्व भाजपा गठबंधन देश–विरोधी तथा जन–विरोधी नीतियों पर एकमत हैं तथा इनकी सरकारें विदेशी तथा देसी बड़े पूंजीपतियों व बड़े सामंतों की सेवा कर रही हैं। सिंगुर तथा नंदीग्राम के विस्थापन–विरोधी आन्दोलनों पर दमन का जिक्र करते हुए का. पल्टू सेन ने बंगाल की सी.पी.एम. सरकार को हत्यारी सरकार बताया तथा कहा कि सी.पी.एम. व सी.पी.आई. जैसे उसके सहयोगी शासक वर्गों के नये विश्वस्त स्रोतों के रूप में अपने–आपको पेश करने के लिए अन्य प्रतिक्रियावादी पार्टियों से प्रतियोगितारत हैं।
जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी के राज्य प्रवक्ता का. वी.के. पटोले ने कहा कि बिहार में नितीश–मोदी सुशासन के तांडव का निशाना देशभक्त जनवादी कम्युनिस्ट क्रांतिकारी हैं। उग्रवाद के नाम पर किसानों एवं मजदूरों पर बर्बरता तथा जनांदोलनों का क्रूर दमन नितीश–मोदी शासन की विशेष पहचान है। बिहार का कोई ऐसा जिला या प्रखंड नहीं है जहां सरकार बेरोजगारों को 100 दिन का रोजगार देने का दावा कर सकती है। बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशों को लागू करना तो दूर पूर्व में वितरित बिहार सरकार हदबंदी से फाजिल जमीन से पचारारियों को बेदखल किया जा रहा है। रोहतास के चावल उद्योग, पत्थर उद्योग में मालिकों द्वारा मजदूरों के भारी शोषण के संबंध में उन्होंने कहा कि श्रम विभाग खुलेआम मालिकों का पालतू बन गया है तथा जहां भी मजदूर आन्दोलन व संघर्ष का रास्ता अपना रहे हैं वहां उनकी हड़तालों को गैरकानूनी ठहराकर सरकार बर्बर दमन कर रही है।
का. वी.के. पटोले ने रोहतास जिला प्रशासन द्वारा क्रान्तिकारी कार्यकर्ताओं के खिलाफ तेज किये गये दमन की निंदा की। उन्होंने का. अशोक कुमार तथा अन्य साथियों की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ आरोपों को झूठा बताया तथा उनकी रिहाई की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए का. अयोध्या राम ने कहा कि जिला प्रशासन सामंती– माफिया गठजोड़ का खिलौना बना हुआ है तथा जनता की मांगों को अनसुना कर रहा है। ऐसी स्थिति में जनांदोलन ही राज्य सरकार की जन–विरोधी नीतियों को चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने जनांदोलन को तीव्र करने का आवाह्न किया।
सभा का अंत नक्सलबाड़ी जिंदाबाद, लाठी–गोली की सरकार नहीं चलेगी–नहीं चलेगी, होश में आओ नितीश सरकार गूंज रही है जनहुंकार आदि नारों के साथ जोश–खरोश के बीच हुआ।
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