बहुराष्ट्रीय कम्पनी पोस्को के प्रबंधकों तथा नवीन पटनायक सरकार ने बड़े जोर–शोर से प्रचार किया था कि 1 अप्रैल को पोस्को स्टील प्लांट का शिलान्यास किया जायेगा। उड़ीसा प्रांत के स्थापना दिवस 1 अप्रैल को उन्होंने उड़ीसा की प्राकृतिक संपदा की लूट के प्रतीक पोस्को स्टील प्लांट की स्थापना के लिए चुना। बहुराष्ट्रीय कम्पनी तथा उसके दलाल राजनेताओं की चुनौती को स्वीकार करते हुए पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति तथा प्रदेश के विस्थापन–विरोधी जनान्दोलनों व राजनैतिक संगठनों ने इसके विरुद्ध एक व्यापक जन समावेश की घोषणा की। विकल्प जन समावेश के लिए बालीतूठा को चुना गया जहां 29 नवम्बर, 2007 को पोस्को समर्थक बीजद नेता दामोदर राउत के गुंडों ने पुलिस के सहयोग से पोस्को–विरोधी आन्दोलनकारियों पर सशस्त्रा हमला किया था। पोस्को समर्थक गुंडावाहिनी, पुलिस तथा राजनेताओं को चुनौती देते हुए संघर्षशील जनता ने उन्हें पीछे धकेलने का निर्णय ले लिया।
क्षेत्र की पोस्को–विरोधी किसान जनता के दृढ़ निश्चय तथा प्रदेश व देश भर के जनवादी व क्रांतिकारी शक्तियों से मिलने वाले समर्थन को देखते हुए पोस्को तथा उसके अनुगामी नवीन सरकार ने 1 अप्रैल के कार्यक्रम को स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसका मकसद पोस्को–विरोधियों के 1 अप्रैल के कार्यक्रम को महत्वहीन बनाना था। पोस्को तथा उड़ीसा सरकार की इस चाल को समझते हुए पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति तथा समर्थक संगठनों ने 1 अप्रैल के विकल्प समावेश को और जोर–शोर से आयोजित करने की घोषणा की। सरकार ने कार्यक्रम को विफल करने के लिए क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी।
सरकारी प्रचार तथा प्रशासन के प्रयास विफल करते हुए हजारों–हजार की संख्या में जनता बालीतूठा पहुंची। कलिंगनगर, गंजाम, कालाहांडी तथा अन्य क्षेत्रो से आये हजार से अधिक कार्यकर्ता ढिनकिया, नुआगांव व गढ़कुजंग के हजारों लोगों के साथ बालीतूठा गये। इस विशाल समावेश ने पुलिस द्वारा लगाये गये बांस के अवरोधों को तहस–नहस कर दिया तथा संघर्षशील जनता ने पुलिस को पीछे हटने को बाध्य किया। जिस स्थान पर 29 नवम्बर को पोस्को समर्थक गुंडों ने संघर्षशील जनता पर हमला किया था तथा बड़ी संख्या में महिलाओं व बच्चों को घायल किया था, उसी स्थान से जनता ने पोस्को, उसके गुंडों तथा पोस्को समर्थक सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान किया।
बालीतूठा में विकल्प समावेश को संबोधित करते हुए पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के नेता अभय साहू ने सर्वप्रथम लोकपख्य के संयोजक क्रांतिकारी बुद्धिजीवी का. राजेन्द्र षडंगी को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने 1 अप्रैल के इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए अथक प्रयास किया था तथा जिसकी सफलता में उनका बड़ा योगदान है। अभय साहू ने कहा कि उड़ीसा सरकार द्वारा पोस्को–स्थापना को उत्कल दिवस के साथ जोड़ने के प्रयास को विफल कर दिया गया है। निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर विकल्प समावेश की सफलता इस बात का स्पष्ट चिन्ह है कि पोस्को को क्षेत्र से भगा दिया गया है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार पोस्को योजना स्थापित करने के प्रयास जारी रखेगी तो संघर्ष भी कई गुना तेज किया जायेगा।
विकल्प समावेश को संबोधित करने वालों में अन्य विस्थापन–विरोधी आन्दोलनों के नेता तथा इन आन्दोलनों का समर्थन करने वाले नेता शामिल थे जिन्होंने पोस्को के खिलाफ संघर्ष का समर्थन करने के साथ पोस्को योजना को रद्द किये जाने की मांग की। 1 अप्रैल के विकल्प समावेश ने आन्दोलन को बल प्रदान किया है तथा पोस्को समर्थकों व राज्य सरकार के सामने गंभीर चुनौती पेश की है।