इफ्टू से संबंधित झारखण्ड माइंस लाल झण्डा यूनियन के नेतृत्व में भारत कोकिंग कोल लि., धनबाद में पीस–रेट मजदूरों ने एक वर्ष के अंतराल में पुन: एक बार सफल संघर्ष किया। ज्ञात हो कि जुलाई 2005 में सम्पन्न एवं 1.7.2001 से लागू सातवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के अंतर्गत पीस–रेटेड मजदूरों के साथ भेदभाव हुआ था एवं सभी मजदूरों के लिए निर्धारित रु. 1185 प्रतिमाह के निश्चित लाभ से कम वेतन बढोत्री उन्हें मिली थी। इफ्टू यूनियन द्वारा पीस–रेट मजदूर संघर्ष कमेटी गठित कर दो वर्ष तक संघर्ष चलाया गया था जिसके फलस्वरूप श्रम विभाग में 27 जून, 2007 को त्रिपक्षीय समझौता हुआ कि इस कमी को पूरा करने के लिए वेतन में आवश्यक बढोत्री की जायेगी। तदानुसार अगले माह जुलाई 2007 से पीस–रेट मजदूरों को 50 रु. से 500 रु. प्रतिमाह की वेतन बढोत्री का भुगतान भी शुरू हो गया।
कोयला उद्योग में केन्द्र सरकार द्वारा वेतन समझौते का एकाधिकार केवल पांच मान्यताप्राप्त यूनियनों (इंटक, बी.एम.एस., एच.एम.एस., एटक, सीटू) को दिया गया है इसलिए उनके वेतन समझौते को मजदूरों द्वारा बदलवाने से उनका चिंतित होना स्वाभाविक था। इनमें से कुछ ने भ्रामक प्रचार कर इसका श्रेय खुद लेने का प्रयास किया और दूसरी तरफ प्रबन्धन के समक्ष सवाल खड़ा किया कि इफ्टू यूनियन के साथ समझौता कैसे किया गया ।
तदानुसार प्रबन्धन का सुर भी बदलने लगा। कंपनी के 17,000 पीस–रेट मजदूरों के 01.07.’01 से 30.06.’07 के 72 महीनों के इस वेतन बढोत्री के करीब 20 करोड़ रुपये के एरियर के भुगतान में आनाकनी करना प्रबन्धन ने शुरू कर दिया। पहले उसने श्रम विभाग को इस आशय का पत्र लिखा कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता से संबंधित इस मामले पर गैर–मान्यताप्राप्त यूनियन के साथ कोई समझौता करना ही गलत था। फिर कंपनी का घाटा, पैसे की कमी इत्यादि बहाने बनाकर टालमटोल करने लगा जिससे ऊब कर मजदूरों ने पुन: संघर्ष करने का निर्णय लिया।
इस बार भौंरा क्षेत्रा के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रो के पीस–रेट मजदूरो को जागृत कर संघर्ष के लिए गोलबंद करने का विशेष प्रयास किया गया जिसमें आंशिक सफलता मिली। 7 मार्च को कंपनी मुख्यालय कोयला भवन पर करीब 200 पीस–रेट मजदूरों ने धरना दिया व अंतत: 14 अप्रैल से हड़ताल का आवाह्न किया गया। कुल मिलाकर कंपनी के 12 क्षेत्रो में से 3 क्षेत्रो; भौंरा सुडामडीह, बागडीगी लोदना, धनसार कुसुण्डा; में हड़ताल की वास्तविक तैयारी हुई। इन क्षेत्रो के पीस–रेट मजदूरों ने हड़ताल का दृढ़ संकल्प लिया। संगठनात्मक सीमाओं के अनुसार विशेष रणनीति बनाते हुए तय किया गया कि हड़ताल खदान के अंदर ही की जायेगी, मजदूर सत्तू–चना बांधकर ड्यूटी पर जायेंगे, खदान के अंदर काम बंद कर बैठेंगे तथा फैसला होने तक ऊपर नहीं आयेंगे। इस प्रकार से मान्यताप्राप्त यूनियनों व प्रबन्धन को मजदूरों को भ्रमित करने तथा उनका मनोबल तोड़ने के कम अवसर मिलते।
खदानों पर रोजाना जोरदार प्रदर्शन, जुलूस व हड़ताल के प्रति मजदूरों के उत्साह को भांपते हुए प्रबन्धन ने 12 अप्रैल को उन्हें मुख्यालय पर वार्ता के लिए बुलाकर आश्वासन दिये किन्तु मजदूर भुगतान की ठोस तिथि के निर्धारण के लिए अड़े रहे। अंतत: हड़ताल की पूर्व संध्या पर 13 अप्रैल को प्रबन्धन ने इफ्टू यूनियन के अध्यक्ष का. रघुनंदन राय के नाम पत्र भेजकर सूचित किया कि 27.06.07 के समझौते को लागू करते हुए 72 महीनों के एरियर का भुगतान व अन्य मांगों को 30.06.’08 तक पूरा किया जायेगा। तब हड़ताल स्थगित की गई। इस सफलता के बावजूद प्रबन्धन की नीयत पर मजदूरों को भरोसा नहीं है और वे संघर्ष की तैयारी बनाये रखने का निर्णय लिए हुए हैं।
पीस–रेट मजदूरों ने फिर एक बार पांचों मान्यताप्राप्त यूनियनों को नजरंदाज कर अपने बल पर संघर्ष कर जीत हासिल की है। किन्तु उद्योगों में व्याप्त कुल निराशा के रक्षात्मक माहौल में ये मजदूर भी अभी तक मान्यताप्राप्त यूनियनों से संगठनात्मक संबंध तोड़ने में झिझकते हैं। उनके आत्मविश्वास और वर्ग चेतना विकसित करने के लगातार प्रयासों की जरूरत है।