Entries Tagged as ‘किसान’

April 30, 2008

नई आर्थिक नीतियां और बढ़ता खाद्य संकट - आशीष

बढ़ते खाद्य संकट तथा बढ़ती कीमतों की मुख्य दोषी केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा लागू की जा रही नयी आर्थिक नीतियां ही है, भले ही शासक दल इस दोष को अन्यथा मोड़ने का प्रयास करें। सरकारी आंकड़े स्वयं इसका सबूत है।
वित्तमंत्री श्री चिदम्बरम ने बेशर्मी से इस महंगाई के लिए अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूँ की [...]

April 29, 2008

बढ़ती महंगाई, सरकार व शासक पार्टियां

बजट भाषण में वित्तमंत्री चिदम्बरम ने स्वीकार किया था कि महंगाई की दर बढ़ने वाली है जब उन्होंने विश्व बाजार में खाद्य फसलों की बढ़ती कीमतों का जिक्र किया था। इस भाषण से यह संकेत मिला कि भारत सरकार महंगाई को `विश्व संकट‘ के नाम लिख खुद को बचाने की तैयारी में है।
पिछले एक माह [...]

April 2, 2008

सासाराम (बिहार) - जन–विरोधी नीतियों के खिलाफ रैली

बिहार की नितीश–मोदी सरकार के ढाई साल के शासन की किसान–मजदूर–विरोधी नीतियों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। भूमि सुधारों के संदर्भ में गठित बंदोपायाय आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल रखा है। जन वितरण प्रणाली से प्राप्त होने वाले अनाज एवं केरोसीन तेल की मात्रा लगातार घटाई जा रही [...]

April 2, 2008

कलिंगनगर तथा पोस्को–विरोधी आंदोलन : कारपोरेट द्वारा कुचलने की कोशिशें

(का. राजेन्द्र षडंगी ने कलिंगनगर तथा पोस्को–विरोधी आंदोलनों के समक्ष मौजूदा चुनौतियों के बारे में एक पत्र 20 मार्च को देश भर में भेजा था।हम यहां उक्त पत्र का संक्षिप्त अनुवाद प्रकाशित कर रहे ह। – संपादक)
13 मार्च, 2008 को टाटा के गुंडों ने कलिंगनगर आन्दोलन के कार्यकर्ता जोगेन जमुदा पर दिनदहाड़े गोली चलाई। [...]

April 1, 2008

शहीद भगत सिंह तथा समकालीन कम्युनिस्ट आंदोलन–२ - एस. एस. महल

भगत सिंह के राजनैतिक रूप से सक्रिय होने के समय रूस में सर्वहारा क्रांति विजयी हो चुकी थी तथा लेनिन के नेतृत्व में कम्युनिस्ट इंटरनेशनल स्थापित की जा चुकी थी। 1922 में कोमिन्टर्न ने उपनिवेशों में क्रांति के सम्बंध में लेनिन की थीसिस ग्रहण की थी जिसमें उपनिवेशों में साम्राज्यवाद–विरोधी संघर्षों का समर्थन किया गया [...]

March 22, 2008

केन्द्रीय बजट 2008–’09 - जनता के लिए घडि़याली आंसू तथा धनी वर्गों को रियायतें

जहां पहले बजट से तात्पर्य सरकार के एक वर्ष के आय–व्यय का विवरण व नये करों और नये खर्चों का विवरण प्रस्तुत करना होता था जिनसे सरकार द्वारा अपनायी जा रही दिशा का पता चलता था, वहीं बजट 2008 तथा पिछले कई वर्षों के बजट महज खोखली घोषणाओं के पर्याय बन गये हैं। गणित से [...]

March 15, 2008

लखनऊ - किसानों और मजदूरों की मांगों पर पार्टी का जोरदार प्रदर्शन

12 मार्च को विधान सभा, लखनऊ के सामने पार्टी ने एक बड़ा धरना देकर राज्य सरकार को किसानों और मजदूरों की विभि समस्याओं पर चेतावनी दी। इसमें भाग लेने के लिए हजारों की संख्या में हाथों में लाल झण्डियां व नारे लिखी हुई तख्तियां लिए किसान व मजदूर, महिलाएं व पुरुष रेलवे स्टेशन पर एकत्रा [...]

February 28, 2008

विदेशी व दलाल पूंजीपतियों को मायावती का तोहफा : गंगा एक्सप्रेस–वे योजना

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 1047 कि0मी0 लम्बी ग्रेटर नोयडा बलिया गंगा एक्सप्रेस–वे की चार साल में निर्माण कराने की घोषणा की है। यह परियोजना प्रान्त के पूर्वी व पश्चिमी छोर के बीच तीव्र गति के परिवहन मार्ग का निर्माण करके इस दूरी को मात्रा 10 [...]

January 1, 2008

देश–विरोधी व जन–विरोधी शासक वर्गों की पार्टियां तथा नक्सलवाद

दिसम्बर माह में एन.डी.सी. की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर कहा कि नक्सलवादी आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इस आशय के बयान वे अपने शासनकाल में पहले भी देते आये हैं। भाजपा को अपना राजनीतिक शत्रु नहीं, महज राजनीतिक–विरोधी समझने वाले कांग्रेसी नेता नक्सलवादियों को देश का शत्रु [...]

December 30, 2007

विस्थापन तथा सेज–विरोधी आंदोलन के सामने नई चुनौतियां

नवम्बर 5 से एक सप्ताह तक नंदीग्राम में पश्चिम बंगाल की सी.पी.एम. सरकार द्वारा विस्थापन का विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ हिंसा के ताण्डव ने सेज तथा विस्थापन के विरुद्ध संघर्षों के सामने नई चुनौती प्रस्तुत की है। कांग्रेस नेतृत्वाधीन केन्द्र सरकार द्वारा सी..पी .एम. की राज्य सरकार को दिये गये सहयोग ने शासक [...]