Entries Tagged as ‘बेरोजगारी’

April 2, 2008

सासाराम (बिहार) - जन–विरोधी नीतियों के खिलाफ रैली

बिहार की नितीश–मोदी सरकार के ढाई साल के शासन की किसान–मजदूर–विरोधी नीतियों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। भूमि सुधारों के संदर्भ में गठित बंदोपायाय आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल रखा है। जन वितरण प्रणाली से प्राप्त होने वाले अनाज एवं केरोसीन तेल की मात्रा लगातार घटाई जा रही [...]

March 22, 2008

केन्द्रीय बजट 2008–’09 - जनता के लिए घडि़याली आंसू तथा धनी वर्गों को रियायतें

जहां पहले बजट से तात्पर्य सरकार के एक वर्ष के आय–व्यय का विवरण व नये करों और नये खर्चों का विवरण प्रस्तुत करना होता था जिनसे सरकार द्वारा अपनायी जा रही दिशा का पता चलता था, वहीं बजट 2008 तथा पिछले कई वर्षों के बजट महज खोखली घोषणाओं के पर्याय बन गये हैं। गणित से [...]

March 1, 2008

चन्द्रशेखर आजाद के 78वें शहादत दिवस पर : जमुना घाटी में सामंत–माफिया गिरोहों व बसपा नेताओं को संगठित चुनौती

रोजगार की रक्षा के लिए मशीनें हटाने का बालू मजदूरों का पुन: सफल संघर्ष

27 फरवरी, 2008 को इलाहाबाद में कई संगठन अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद का 78वां शहादत दिवस मना रहे थे। पार्टी ने भी इस अवसर पर घूरपुर में एक यादगार सभा का आयोजन किया था, जिसमें लगभग 300 लोगों ने भाग लिया। [...]

February 29, 2008

भारत में केवल 41 प्रतिशत लोगों के पास किसी भी प्रकार का रोजगार! बढ़ती बेरोजगारी व बढ़ती विकास दर जन–विरोधी व्यवस्था का कमाल!

बढ़ती बेरोजगारी
11 फरवरी, 2008 को जयपुर (राजस्थान) के पास अम्बर शहर में सी.आई.एस.एफ. (केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के लिए नाई व धोबियों की नौकरियां हेतु भरती चल रही थी। हालांकि ये पोस्ट `कुशल’ माने जाते हैं, परीक्षा के लिए 80,000 उम्मीदवार पहुंच गये। बिहार, राजस्थान, हरियाणा व अन्य प्रान्तों में पिछले वर्षों में अर्धसैनिक  बलों [...]

January 1, 2008

देश–विरोधी व जन–विरोधी शासक वर्गों की पार्टियां तथा नक्सलवाद

दिसम्बर माह में एन.डी.सी. की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर कहा कि नक्सलवादी आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इस आशय के बयान वे अपने शासनकाल में पहले भी देते आये हैं। भाजपा को अपना राजनीतिक शत्रु नहीं, महज राजनीतिक–विरोधी समझने वाले कांग्रेसी नेता नक्सलवादियों को देश का शत्रु [...]